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इन 2 होनहार युवाओं ने फिर बजाया गिरीपार क्षेत्र का डंका, पाया ये मुकाम

एक है दृष्टिबाधित, तो दूसरा श्रवण दिव्यांग, पढ़कर कहेंगे वाह क्या बात

न्यूजघाट ब्यूरो। पांवटा साहिब
सिरमौर का अति पिछडा क्षेत्र ट्रांसगिरी के युवा हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं । हाल ही में ट्रांसगिरी के दो युवकों यूजीसी नेट उत्तीर्ण कर दिया। इनमें से एक दृष्टिबाधित है तथा दूसरा श्रवण विकलांग। इनके बारे में जानकर आंखें नम होना स्वाभाविक है। दृष्टिबाधित विनोद शर्मा सुपुत्र श्री जीतू राम शर्मा अत्यंत पिछडे क्षेत्र ठोंठा जाखल पंचायत के अंतर्गत बाईला गांव के एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। विनोद शर्मा की परवरिश व प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण परिवेश मे हुई।

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वर्ष 2009 में नवमी कक्षा में रा.व.मा.वि.तारुवाला में प्रवेश लिया और वार्षिक परीक्षा में अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। दसवीं की पढाई के दौरान विनोद शर्मा की आँखों की रोशनी चली गई और पढाई अधर में लटक गई।पीजीआई चंडीगढ में उपचार के दौरान पता चला कि इन्हें ब्रेन ट्यूमर है। सफल आप्रेशन होने पश्चात घर लौटे तब दो साल बर्बाद हो चुके थे । पढने का बहुत शौंक था किसी से सुना कि दृष्टिबाधित बच्चों के लिए सरकार द्वारा विशेष विद्यालय खोले गए हैं। और दसवीं कक्षा में ढली में स्थित विशेष विद्यालय में प्रवेश लिया और दसवीं पास की।

यहीं पर इन्होंने ब्रेल लिपि के माध्यम से पढना सीखा। वर्ष 2014 में +2 कला संकाय में रा.व.मा.वि. ढली में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष2017 में बीए ओ ग्रेड राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय संजौली से उत्तीर्ण की। इसी बीच विनोद के सिर माँ का साया भी छिन गया। विनोद के भाई श्री सीता राम शर्मा दिहाडी मजदूरी कर इन्हें पढा रहे हैं। विनोद का कहना है कि उमंग फाऊंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्री वास्तव हमारे जीवन में एक फरिश्ता बनकर आए। इन्होनें हमें अनेक सुविधाएं मुहैया करवाई। वर्तमान में विनोद एचपीयु में एम.ए. राजनीति शास्त्र तृतीय सत्र का छात्र है । विनोद ने दूसरे प्रयास में ही राजनीति शास्त्र में नेट परीक्षा पास की है । विनोद शर्मा राजनीति शास्त्र विषय का प्रोफेसर बनना चाहता है। इस सफलता का श्रेय प्रो.अजय श्री वास्तव व माँ-बाप सदृश बडे भाई सीता राम शर्मा को देते हैं ।

हर विकट परिस्थिति में दोनों विनोद के साथ खडे रहते हैं। दूसरी ओर माशू गांव के साधारण परिवार से संबंध रखने वाला मुकेश शर्मा सुपुत्र रमेश शर्मा श्रवण विकलांग है । इन्होंने देव भाषा संस्कृत में यूजीसी नेट परीक्षा पास की। मुकेश से बातचीत करने से पता चला कि वह बचपन से ही श्रवण विकलांग है । इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय नाहन से विशिष्ट शास्त्री की उपाधि प्राप्त की । तत्पश्चात बीएड और एम.ए.संस्कृत की उपाधि प्राप्त की। मुकेश रोज 8से 10 घंटे अध्ययन करता है ।

परीक्षा तैयारी में सदैव इनको चाचा नीता राम भारद्वाज व मित्र नरेश शर्मा का सहयोग मिलता रहा। मुकेश समाजिक सेवा कार्यों में भी सदैव आगे रहता है। वर्तमान में मुकेश रा.व.मा.वि. जामना में बतौर एसएमसी शिक्षक शास्त्री पद पर सेवाएं दे रहा है।मुकेश का सपना प्रोफेसर बनना है । यह अपनी सफलता का श्रेय अपने पिताजी को देना चाहता है। ट्रांसगिरी युवाओं की इस उपलब्धि पर सभी क्षेत्रवासियों नाज है।

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