आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की मांग, सरकारी कर्मचारी घोषित करे सरकार

रेणुका गोस्वामी। मनाली
देश भर में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के समेकित बाल विकास योजना का सफलता पूर्वक संचलान कर रहे आंगनवाडी कार्यकर्ता एव सहायिका को सरकारी कर्मचारी घोषित करने मांग की है। देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही आंगनवाडी कार्यकर्ता व सहायिका सरकार पर अनदेखी का आरोप लगा रही है। आंगनवाडी कर्मचारी संघ कुल्लू भारतीय मजदूर संघ ने जिला अध्यक्ष की अध्यक्षता में एसडीएम मनाली के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की मांग है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।

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    आंगनवाडी कार्यकर्ता को 18 हजार व सहायिका को 9 हजार वेतन दिया जाए साथ ही समाजिक सुरक्षा के तहत पी एफ पेंशन, ग्रेच्यूटी एवं चिकित्सा सुविधा सहित बीमा राशि में बडोतरी की जाए।15 साल पूरे करने वाले कर्मचारी को वरिष्ठ आंगनवाडी कार्यकर्ता घोषित किया जाए। वर्तमान में लागू मानदेय पोषाहार राशि का भुगतान प्रतिमाह समय पर दिया जाए। दुर्गम एवं कठिन क्षेत्रों में सेवाएं दे रही कार्यकर्ता व सहायिका को कठिनाई भत्ता का भुगतान किया जाए। संघ की अध्यक्ष दमयन्ती और महासचिव पार्वती देवी ने बताया कि आंगनवाडी कार्यकर्ता व सहायिका 0 से 6 साल तक के बच्चे के पोषण एवं प्राथमिक स्वास्थ्य की देखभाल सहित अनौपचारिक शिक्षा के साथ पूरक आहार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है।

    उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ शिशु एवं स्तनपान तथा गर्भवती माताओं करे कुपोषण से बचाने के लिए जरूरी अहार विटामीन, प्रोटीन उपलब्ध करवाने का कार्य भी केंद्र सरकार की इस स्कीम के तहत सभी कार्य आंगनवाडी कर्मियों द्वारा ही किए जा रहे है। उन्होंने बताया कि राज्य शाशन के द्वारा बीएलओ, आर्थिक जनगणना, पल्स पोलियो अभियान, फाइेलेरिया, राशन कार्ड सत्यापन और ओडीएफ आदि कार्य भी आंगनवाडी कार्यकर्ता से संपन्न करवाए जा रहे है। इन प्रतिनिधियों ने कहा कि आंगनवाडी कार्यकर्ता की जिम्मेबारियों को तो बढा दिया गया लेकिन आंगनवाडी कार्यकर्ता के हित पर कभी ध्यान नहीं दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आंगनवाडी कार्यकर्ता व सहायिका को सरकारी कर्मचारी घोषित कर उन्हें उनका हक प्रदान करे।

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