ये है IGMC शिमला के हाल! इमरजेंसी तक में नहीं मिलते डॉक्टर

वीएस पाठक। शिमला
गोल्डन जुबली मना कर बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने का दावा करने वाला प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल आईजीएमसी में मरीजों को इलाज कम परेशानियां अधिक झेलने को मिलती है। मरीजों को एक छोटे से काम के लिए घंटो इधर -उधर बटकना पड़ता है लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिलता है। ऐसा ही वकया रविवार को आपतकाल विभाग में पेश आया जब मरीजों को सीएमसो यानि कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर के एक दस्खत के लिए घंटे इधर -उधर भटकना पड़ा लेकिन उन्हें पुरे अस्पताल में कहि भी सीएमओ नहीं मिला। थक कर दर्जनों तीमारदार अपने मरीज को अकेला छोड़ कर सीएमओ कमरे के बाहर धरना देकर खड़े हो गए और 3 घंटे तक इंतजार करते रहे। एक तीमारदार द्वारा प्रशासन को शिकायत करने पर प्रशासन ने एक सीएमओ को भेजा जिसने मरीजों का चेकअप किया।

    ड्यूटी पर पहुंचे सीएमओ ने कहा की वह बीती रात को 15 घंटे की ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे थे की उन्हें फिर से बुला लिया गया जबकि रोस्टर में जिस चिकत्स्क की ड्यूटी उसने सूचना तक नहीं दी जिसके कारन मरीजों को घंटो कतार में लग कर इन्तजर करना पड़ा। एक चिकित्सक था की रोस्टर में 8 सीएमओ की ड्यूटी लगी है जो 8 घंटे की ड्यूटी करके वापसी चले जाते है फिर दूसरा सीएमओ आता है। लेकिन वास्तव में दो ही सीएमओ को ही ड्यूटी पर तैनात किया जाता है। आपतकाल में मौजूद कर्मचारियों का आरोप है की प्रसाशन रोस्टर चहेतों को लाभ पहूंचाने के लिए किसी सीएमओ को एक भी ड्यूटी नहीं लगाता जबकि किसी को 36 घंटे काम करने के बाद भी वापसी बुला लेता है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया की कमेटी ने जो रोस्टर सीएमओ का बनाया उसमे किसी और का नाम हे लेकिन जब प्रिंट होकर आया तो उसमे किसी और का नाम होता है जिसमे यह गड़बड़ी हो जाती है जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।

ये काम है सीएमओ का
अस्पताल में शाम 4 बजे के बाद और सुबह 9 बजे तक अस्पताल की जिम्मेवारी सीएमओ की होती है। अस्पताल में आने वाला कोई भी मरीज पहले सीएमओ चेक करता है उसके बाद वह सम्बन्धित चिकित्सक के पास भेजता है। यही नहीं आपतकाल में कोई भी टेस्ट के लिए पहले सीएमओ के सिगनेचर होना जरुरीं है उसके बिना इलाज नहीं होता है। ऐसे में सीएमओ का रोल आपतकाल में काफी अहम होता है। लेकिन जब घंटो तक अस्पताल में सीएमओ नहीं मिलता जहा पर प्रतिदिन 2000 के लगभग ओपीडी होती है और आपतकाल में 200 लगभग गंभीर मरीज प्रतिदिन आते है ऐसे में मरीजों को परेशनी उठानी पड़ती है। इस समबन्ध में अस्पताल के एमएस डॉ रमेश चंद का कहना है की सीएमओ अपने कमरे में है और मरीजों का इलाज हो रहा है।

vishal-garments
Facebook Comments

Related posts