तो क्या फिर ये झूला पुल बनेगा चुनावी? गिरीपार में रोजाना जान जोखिम में डालकर होता है सफर

संजय कंवर। पांवटा साहिब
हिमाचल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। लिहाजा अब नेता भी मतदाताओं को एक बार फिर लुभाने के लिए घर-घर दस्तक दे रहे हैं। वहीं अब जनता भी नेताओं से दो-दो हाथ करने को तैयार है। अब समय ये है कि नेताओं को जनता के सवालों के जवाब देने है। लिहाजा अब विधानसभा चुनाव के लिए मुद्दे का जिन्न भी बोतल से बाहर आ रहा है। इस बार विधानसभा चुनाव में सिरमौर जिला के दुर्गम क्षेत्र शिलाई की जनता भी नेताओं से सवालों के जवाब मांगने व उन्हें ठगने का पूरा हिसाब किताब बनाए बैठी है।

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    इस बार विधानसभा चुनाव में बरसों से उत्तराखंड-हिमाचल को आपस में जोड़ने वाली टौंस नदी में एक अदद पुल का मुद्दा भी नेताओं को हावी पड़ेगा। यहां टौंस नदी पर रोजाना हिमाचल के गिरीपार व उत्तराखंड के जोनसार बाबर का सफर जिंदगी का दांव पर रख लोग तय कर रहे हैं। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि वीरभद्र सरकार में रोजगार सृजन कमेटी के अध्यक्ष पद पर पूर्व विधायक हर्षवर्धन विराजमान है, जोकि मुख्यमंत्री के खास सिपाहसलारों में से एक गिने जाते हैं। साथ ही सबसे अधिक राज भी यहां कांग्रेस ने ही किया है। यही नहीं रोजाना जनसंपर्क अभियान के जरिये भाजपा के विधायक बलदेव तोमर भी विकास के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थक रहे है। बावजूद इन दोनों नेताओं के बड़े-बड़े दावे भी इस स्थिति को देख धूल फांकते नजर आ रहे हैं। दरअसल गिरीपार के मोहराड़ क्षेत्र से उत्तराखंड के कवाणू के बीच टौंस नदी पर एक झूला पुल बना हुआ है। दशकों से टौंस नदी पर पुल बनाने की मांग की जा रही है। मगर आज तक सरकार ने इस दिशा में शायद ही कोई उचित कदम उठाया हो। नतीजतन रोजाना गिरीपार से उत्तराखंड के कवाणू से होते हुए जोनसार बाबर का सफर टौंस नदी पर जान हथेली पर रखकर पार किया जा रहा है। कई दशकों से लोग इसी झूल पुल के जरिये नदी को आरपार करते आ रहे हैं। सड़कों-पुलों के दावे करने वाली सरकार के यहां सभी दावे फेल हो रहे हैं।

     नतीजतन लोगों ने भी शायद यहां पुल बनने की आस छोड़ दी है, क्योंकि दशकों बाद भी उनकी मांग को आज तक सरकार ने पूरा नहीं किया है। जौनसार और गिरीपार को जोडने वाली यह वर्तमान स्थिति यह बताती है कि बेशक आप नदी पार कर सकते हो, लेकिन पहले अपना जीवन बीमा कर लो। यदि नेताओं की कमिशन खोरी का मात्र एक फीसदी हिस्सा भी गिरीपार को मिल जाए, तो यहां विकास की रोशनी पहुंच सकती है। पर ये तो मात्र कल्पना है। इसके लिए गिरीपार का जनजातीय क्षेत्र बनना बेहद जरूरी है। तभी विकास होगा, नहीं तो यहां का विकास मात्र दिवास्वप्न ही है।

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