परेशानी का सबब बना IGMC का निशुल्क जैनेरिक स्टोर, नहीं मिल रही दवाइयां

वीएस पाठक। शिमला
आईजीएमसी में मरीजों की सुविधा के लिए खोला गया निशुल्क जैनेरिक स्टोर मरीजों के लिए परेशानी बन गया है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी यहां मरीजों को डॉक्टरों की ओर से पर्ची में लिखी गई पूरी दवाएं नहीं मिल रही। ऐसे में जैनेरिक स्टोर के बाद मरीजों को सिविल सप्लाई या निजी मेडिसन शॉप में दवाएं खरीदने पहुंचना पड़ रहा है। सरकार की ओर से दी गई यह सुविधा का मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। इसमें मेडिसन समेत अन्य कई विभागों में दवाएं बाहर से लिखने की समस्याएं आ रही है। इससे जहां मरीजों को परेशानी हो रही है, वहीं स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों की अवहेलना भी हो रही है, जिसमें उन्होंने डॉक्टरों को जैनेरिक दवाएं लिखने के निर्देश दिए हैं। आईजीएमसी के जैनेरिक स्टोर में मरीजों को पूरी दवाएं नहीं मिल पाती।

      पर्ची पर आईजीएमसी के डॉक्टरों की ओर से लिखी गई दवाओं में एक या दो दवाएं ही जैनेरिक स्टोर में मिल पाती है, जबकि अ‌ाधी से ज्यादा दवाएं लेने निजी मेडिसन शॉप में पहुंचना पड़ता है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि यह दवाएं जैनेरिक स्टोर में उपलब्ध रहती है, मगर डॉक्टरों की ओर से दूसरी दवाएं लिखी जाती है, जो निजी मेडिसन शॉप में मिल पाती है। आईजीएमसी स्थित जैनेरिक स्टोर में कुल 244 प्रकार की दवाएं मिलती है। यह दवाएं आईजीएमसी में विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की ओर से दी गई लिस्ट के अनुसार रखी जाती है। प्रशासन ने करीब चार माह पहले ही आईजीएमसी के जैनेरिक स्टोर में नई दवाओं की लिस्ट दी थी। इससे पहले यहां पर 487 प्रकार की दवाएं मिलती थी, मगर प्रशासन ने यह लिस्ट घटाकर 244 कर दी थी। यहां पर केवल जैनेरिक दवाएं ही मिलती है।

      जैनेरिक स्टोर में केवल ओपीडी में आने वाले मरीजों को ही दवाएं दी जाती है। हालांकि शुरूआत में यहां पर इंडोर पेशेंट को भी दवाएं दी जाती थी। मगर प्रशासन ने नियम न होने की बात कहकर उसे अब बंद कर दिया है। अब केवल यहां पर ओपीडी में आने वाले रोगियों को ही दवाएं दी जाती है। स्टोर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। रात को इसे बंद कर दिया जाता है।

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लिस्ट से बाहर लिखी होती है दवाएं : इंचार्ज
इस बारे में आईजीएमसी स्थित जैनेरिक स्टोर इंचार्ज अमन ठाकुर ने कहा कि उनके पास आईजीएमसी प्रशासन की ओर से दी गई 244 दवाएं मौजूद हैं। बावजूद इसके पर्ची में डॉक्टर अलग दवाएं लिखते हैं। जो स्टोर से नहीं दी जा सकती। यह समस्या पिछले काफी समय से आ रही है।

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