सेब के कारोबार पर छाया संकट, क्लिक पर जानिये इसकी वजह

वीएस पाठक। शिमला
मौसम की बेरूखी के चलते इस बार सेब के कारोबार पर संकट छा गया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार सेब की फसल का उत्पादन कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। सर्दियों में कम बर्फ गिरने ओर उसके बाद एकाएक आए मौसम में बदलाव के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है। करीब 4 हजार करोड़ के सेब के कारोबार में भारी गिरावट आने के भी आसार नजर आने लगे है। जिसके कारण प्रदेश के बागवान मायूस हो गए है उन्हें अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। सेब के कारोबार से प्रत्यक्ष ओर अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को करोबार जुड़ा है। राज्य में 1 लाख हैक्टयर से ज्यादा क्षेत्र में सेब का कारोबार किया जाता है।

     बागवानी विभाग के अनुमान के मुताबिक इस बार सेब के उत्पादन का आंकड़ा 2 करोड़ पेटियां के आसपास रहेगा। जबकि पिछल्ले साल प्रदेश में करीब 2.34 करोड़ सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था। प्रदेश सबसे जयादा सेब का कारोबार शिमला जिला में होता है। लेकिन इस बार जिला शिमला के अधिकतर क्षेत्रों में सेब के बागीचों में कम फ्लावरिंग हुई। लिहाजा इन क्षेत्रों में सेब के उत्पादन में भारी गिरावट आंकी जा रही है। यही हाल कुल्लू और मंडी जिलों के भी है। यहां से सेब सेब की कम फसल के उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रदेश बागवानी विभाग के अधिकारी भी मानते है अभी तक फिल्ड से जो रिपोर्ट आ रही है उसके मुताबिक उसके मुताबिक सेब उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। शिमला जिला के कोटगढ़, रोहड़ू, कोटखाई, जुब्बल, नारकंडा व चौपाल क्षेत्र में सेब की सेटिंग काफी कम है।

फील्ड से उत्पादन की रिपोर्ट मांगी- बवेजा
उधर, बागवानी विभाग के निदेशक एचएस बवेजा ने माना कि कई क्षेत्रों से सेब की फसलके कम उत्पादन की सूचना मिल रही है। विभाग के सभी फील्ड स्टॉफ को अपन-अपने क्षेत्रों से सेब की रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। उनका कहना है कि 10 जून तक सेब के उतपादन की फाइनल रिपोर्ट तैयार कर दी जाएगी।

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