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संजय सिंघल के समर्थन वापसी से अल्पमत में पांवटा साहिब नगर परिषद

नरेंद्र धीमान। पांवटा साहिब
पांवटा साहिब में भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय सिंघल के समर्थन वापसी से नगर परिषद अल्पमत में आ गई है। पांवटा नगर परिषद में 7 पार्षद भाजपा समर्थि हैं और 6 कांग्रेस समर्थित पार्षद है। ऐसे में नगर परिषद के गिरने की स्थिति बन गई है। दूसरी और कांग्रेस खेमे में जोड़-तोड़ शुरू हो गया है। अपनी नगर परिषद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने व संजय सिघंल के इस निर्णय से भाजपा के एक खेमे को करारा झटका लगा है ।

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     गौर हो कि नगर परिषद अध्यक्षा कृष्णा धीमान व उपाध्यक्ष नवीन शर्मा भाजपा के मदन शर्मा के काफी नजदीकी माने जाते हैं। दूसरी और संजय सिंघल जिला भाजपा अध्यक्ष चौधरी सुखराम के करीबी हैं। गौर हो कि वीरवार को पार्षद संजय सिंघल ने समर्थन वापसी लिए डीसी सिरमौर और ईओ को पत्र लिखे हैं। ऐसे में भाजपा समर्थित नगर परिषद अल्पमत में आ गई है। सूत्र बताते हैं कि संजय सिंघल काफी समय से अपनी ही नगर परिषद सदस्यों से नाराज चले हुए थे। उनके आरोप थे कि उन्हें हाउस में वह तरजीह नहीं दी जाती, जिसके वह हकदार हैं। ऐसे में समर्थन वापसी अध्यक्षा और उपाध्यक्ष को डराने के लिए फैंका गया पासा हो सकता।

कांग्रेस खेमों मे जोड़-तोड़ शुरू
उधर सूत्र बता रहे हैं कि कांग्रेस खेमे में जोड़ तोड़ की लड़ाई शुरू हो गई है। कांग्रेस की समस्या यह है कि वहां भी दो खेमे है और एक खेमा दूसरे को अध्यक्ष पद पर नहीं देख सकता। ऐसे में वहां भी पार्षदों को एक छत्र तैयार करना आसान नहीं है। वहीं एक कांग्रेस पार्षद ने कहा कि वैसे तो ये सब ड्रामा है, लेकिन एक प्रतिशत भी संभावना बनी तो इस बार कांग्रेस एक जुट है।

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