धर्मगुरू दलाईलामा ने किया शांता कुमार की पुर्नप्रकाशित पुस्तक का विमोचन

न्यूजघाट टीम। धर्मशाला
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता व वर्तमान में कांगड़ा-चंबा लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं लेखक शांता कुमार की बहुचर्चित पुस्तक हिमालय पर लाल छाया, उनकी धर्मपत्नी संतोष शैलजा की अंग्रेजी कथा पुस्तक ‘‘इफ ऑटम कम्ज’’ और डॉ. हेमराज कौशिक कृत लेखक शांता कुमार के कृतित्व पर आलोचनात्मक पुस्तक ‘‘साहित्य सेवी राजनेता शांता कुमार’’ का लोकार्पण आज मैक्लोडगंज स्थित तिब्बतियों के मुख्य मंदिर में तिब्बतियों के धर्म गुरु व शांति के नोबल पुरस्कार से सम्मानित महामहिम दलाईलामा ने अपने कर कमलों द्वारा किया।

       इस मौके पर महामहिम दलाईलामा ने पुस्तक के लेखक शांता कुमार व उनकी धर्म पत्नी को बधाई देते हुए कहा कि शांता कुमार ने अपने अनुभव के आधार पर इस पुस्तक का लेखन किया है। इससे भविष्य में युवा पीढ़ी व इतिहासकारों को इसका लाभ मिलेगा।

      इस अवसर पर अपने संबोधन में शांता कुमार ने कहा कि चीन के दुव्र्यवहार के कारण तिब्बत देश के लाखों लोगों को अपना देश छोड़ कर बेघर होना पड़ा और हयूमन राईट कमीशन के अनुसार तिब्बत में हजारों लोगों की बेरहमी से हत्या की गई है। परंतु आज दिन तक महामहिम दलाई लामा ने चीन के खिलाफ कोई भी नकारात्मक टिप्पणी नहीं की है और हमेशा अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश पूरे विश्व को दिया है। हिमालय पर लाल छाया पुस्तक की पृष्ठभूमि में स्वतंत्र भारत के इतिहास की वह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, जिसने हिमालय को रक्तरंजित किया था।

       1962 में चीनी हमले में भारतीय सेना की शर्मनाक पराजय हुई। यह हार वास्तव में तत्कालीन सरकार की लापरवाही से हुई थी। भारत की सरकार पंचशील के भ्रम में और हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे में मस्त रही। यद्यपि चीन द्वारा तिब्बत के अधिग्रहण के बाद भारतीय सीमा पर घुसपैठ बराबर चलती रही। पराक्रमी और मित्र देशों की विश्व युद्धों में विजय में कारण रही। वही सेना 1962 में चीन से बुरी तरह परास्त हुई। कांगड़ा जनपद उन दिनों पंजाब का एक भाग था। इस युद्ध में कांगड़ा जनपद के सर्वाधिक सैनिक शहीद हुए। कांगड़ा का शायद ही कोई ऐसा गांव अथवा परिवार होगा, जहां के वीर सैनिकों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति न दी हो। उन दिनों सेना की और से केवल शहादत का तार की घर पहुंचता था।

      इस भयावह वातावरण में लेखक ने इस त्रसदी को कलमबद्ध करने का निर्णय लिया। वर्ष 1965 में जब हिमाचल पर लाल छाया पहली बार छपी तो पाठकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। कारण विशेष यह था कि भारत-चीन आक्रमण और इससे संबंधित जानकारी हिंदी में बहुत कम उपलब्ध थी और सूचनाओं के अभाव में सरकारी तंत्र पर ही पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था। शांता कुमार कहते हैं कि इस पुस्तक को लिखने का विचार जब मन में आया तो यही उत्कंठा बनी रही कि तथ्यपरक सामग्री का संग्रहण और सरकारी दस्तावेजों की जानकारी कहां से प्राप्त होगी। उन दिनों इंटरनेट नहीं था। संदर्भ पुस्तकों को पढ़ने के लिए कांगड़ा जैसी जगह में सीमित साधन थे।

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      मैंने पद्वी संतोष शैलजा से विचार विमर्श किया और उनके हामी भरने के बाद हम दोनों इस पुस्तक के लिए कार्य करने लगे। बस किताब की पांडुलिपि जल्दी तैयार करने के विषय में सोचते रहे। सामग्री और सूचना एकत्रित करना श्रम साध्य था, लेकिन हम लोग जुटे रहे। पुस्तक में संलग्न संदर्भ सूचि से आप हमारे प्रयास का आकलन कर सकते हैं। प्रसन्नता तब और अधिक हुई जब प्रकाशन की व्यवस्था भी दिल्ली से हो गई। आज लगभग पांच दशक से अधिक समय के बाद पुनःप्रकाशन का उद्देश्य अतीत के उन पन्नों को पुनः पाठकों तक पहुंचाना है, जिसके कारण मातृभूमि पर संकट आया था। स्थितियां आज भी जस की तस हैं।

       चीन और पाकिस्तान के संदर्भ कोई रहस्य नहीं हैं। भारत प्रकाशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित 340 पन्नों की इस पुस्तक में 28 अध्याय हैं, जिसमें चीन के साम्राज्यवादी विस्तार के इतिहास से लेकर तिब्बत की हत्याए भारत-चीन सीमा विवाद, हार क्यों ओर किसकी, विदेश नीति व वर्तमान और भविष्य जैसे महत्वपूर्ण अध्याय हैं। परिशिष्ट में दलाईलामा से साक्षात्कार दिया गया है, जो अब भी अ¨हसात्मक मार्ग को ही अपना मार्ग मानते हैं। पुस्तक में पुरोवाक भी दलाईलामा ने दिया है। इफ ऑटम कम्ज संतोष शैलजा की उन 29 हिंदी कहानियों का अंग्रेजी अनुवाद है, जिन्हें साहित्य के पाठकों ने सराहा है। हिंदी कथा संसार से इतर इन लोकप्रिय कहानियों को अंग्रेजी के पाठकों तक पहुंचाने का यह श्रमसाध्य सफल प्रयास कथाकार संतोष शैलजा ने स्वंय किया है।

       साहित्यसेवी राजनेता शांता कुमार, डॉ. हेमराज कौशिक की पुस्तक है, जो शांता कुमार के समग्र चिंतन और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालती है। राजनेता शांता कुमार के लेखन और चिंतन को समझने लिए 311 पृष्ठों की यह पुस्तक अत्यंत ही महत्वपूर्ण और उपयोगी है।

      पुस्तकों के विमोचन कार्यक्रम में मंडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद राम स्वरूप शर्मा, पूर्व मंत्री किशन कपूर, रमेश धवाला व शाहपुर की विधायक सरवीन चौधरी, सुलाह विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक विपन सिंह परमार, पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन शर्मा, कांगड़ा के पूर्व विधायक संजय चौधरी निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रतिनिधि सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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