WATCH PICS : राजधानी दिल्ली में छाई ‘‘सिरमौरी नाटी’’, हर कोई हुआ कायल

न्यूजघाट टीम। राजगढ़
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य से जनपथ दिल्ली में राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन 15 से 24 अक्तूबर तक विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में चूड़ेश्वर सांस्कृतिक मंडल जालग ने भी हिस्सा लिया। इस विशाल आयोजन में हिस्सा लेने के बाद सिरमौर लौटे चूड़ेश्वर लोक नृत्य सांस्कृतिक मंडल जालग के महामंत्री जोगेंद्र हब्बी ने बताया कि मंत्रालय द्वारा आयोजित इस विशाल सांस्कृतिक आयोजन में चूड़ेश्वर के लोक कलाकारों द्वारा प्रदर्शित सिरमौरी नाटी को बेहद पसंद किया गया।

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      इस महोत्सव का शुभारंभ पंद्रह अक्तूबर को गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा किया गया था। जबकि समापन देश के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा 24 अक्तूबर को किया गया। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर, महेश शर्मा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, वेंकैया नायडू शहरी विकास एवं संसदीय कार्यमंत्री भारत सरकार व अन्य राज्यों से आए महामहिम राज्यपाल सहित राज्य मंत्रियों द्वारा भी इस आयोजन के अनेकों दिनों में मुख्य अतिथि के रूप शिरकत की गई। कलाकारों के लिए ये बड़े गर्व की बात है कि गत वर्ष इसी अक्तूबर माह में लोक कलाकारों को दिल्ली में आयोजित होनेpranv वाले प्रथम राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में भाग लेने का सुअवसर प्राप्त हुआ था।

     इसी वर्ष भी कलाकारों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेकर प्रदेश की संस्कृति को देश भर के समक्ष रखा। संस्था के बेहतरीन प्रदर्शन के फलस्वरूप इस वर्ष पुनः इस विशाल आयोजन में जहां महामहिम द्वारा द्वीप प्रज्वलित करते हुए इस दल के दो कलाकारों की सहभागिता होना व सांस्कृतिक कार्यक्रम के शुभारंभ में देव आराधना में रेणुका मां की भेंट, सिरमौर की संस्कृति का अंतर्राट्रीय स्तर पर प्रदर्शित होना सिरमौर की लोक कलाओं के मान सम्मान में ओर इजाफा हुआ है। इस सांस्कृतिक आयोजन में चूड़ेश्वर के लोक कलाकारों द्वारा सुविख्यात कोरियोग्राफर मैत्री पहाड़ी द्वारा कोरियोग्राफ किए गए नृत्य का प्रदर्शन संस्कृति महोत्सव के समापन दिवस पर किया गया। विभिन्न राज्यों से आए लगभग बीस साॅस्कृतिक दलों ने समापन कार्यक्रम में भाग लिया।

       कार्यक्रम की शुरूआत सुविख्यात लोक साहित्यकार व विद्वान एवं चुड़ेश्वर के मुख्य सलाहकार विद्यानंद सरैक द्वारा लिखित अनिवद्व गायन, माईं रेणुका रे तोपो रा ठाॅव, देव पोरशु रामों एथै पुजदे आवो….. से किया गया। अन्य गीतों में जेठी माई म्हारे रेणुका गाणी…….. भाभी, तेरा ढाठकु काला…….. आदि गीतों में नृत्य अदाकारी ने दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया। इस आयोजन में महाराष्ट्र का शिव ढोल वादन व सांैगी मुखौटा, तमिलनाडू का गरगाटम, सिक्किम का संगीनी ,उतरप्रदेश का पाईड़ंडा व मयूर नृत्य, कर्नाटक का कुच्ची पूड़ी, छत्तीसगढ़ का दोरमालिया, तैलंगाना का बांसुरी, मध्य प्रदेश का राई व गुदूमबाजा, केरल का ओपानाथिउ, पांडीचेरी का विरामबीर नादम, असम का बीहू ,अरूणाचल का रिंगमपादा, राजस्थान का तहरीया, धूमर, कालबेलिया व आॅगीगैर, जम्मू का कुद, कश्मीर रूफ, पंजाब का भंगड़ा व हरियाणा टमक वादन ओर फाग नृत्य, उतरांचल का घसीयारी नृत्य, छपेली, छौलिया गोआ का गुड़गुप्प नागालंेड का थाॅग टा, वार डाॅस, उडीसा का छाउ, गुजरात का सींधी धमाल आदि नृत्य के साथ-साथ हिमाचल की सिरमौरी नाटी ने अलग पहचान बनाई।

      इस इस दल द्वारा सांस्कृतिक आयोजन में अलग- अलग दिनों के प्रदर्शन में नाटी की प्रस्तुति की विशेषता नर्तकों द्वारा बसंत का ठोडा, बरसात का माला व दीपक नृत्य के साथ-साथ पंडवायण के अनुसार सुदर्शन चक्र का अनुकरण आठ कलाकारों परात नृत्य के प्रवीण कलाकारों द्वारा प्रस्तुति अतयंत रोमांचकारी रही।  लोक गायकों ने रासा नृत्य के दोरान हारूल की प्रस्तुति देकर प्रदेश की एक अलग विधा का प्रदर्शन किया। गौरव की बात है कि पूरे देश से आए लगभग 1800 कलाकारों में चुड़ेश्वर के कलाकारों ने विशेष पहचान बनाई है।

     हाब्बी ने बताया कि सिरमौर के कलाकारों को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित इस गौरवमयी विशाल सांस्कृतिक उत्सव में रामलाल, धर्मपाल, चमन जीवनसिंह, चेतराम, गोपाल, रमेश, हंस राज, अमीचंद, सीमा, सरोज, अनुजा, हीना, मुकेश ने पूरी मंहनत व मनवचन से प्रस्तुतियां देकर नाटी की पहचान बनाई है, जिसके परिणाम स्वरूप राज्यों ने भी इस दल को अनेकों महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों पर आमंत्रित किया है।

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