WATCH PICS : ओर अपने-अपने घर पहुंच गई अमानतें, बच्ची ने किया गृह प्रवेश

वीएस पाठक। शिमला
कमला नेहरू अस्पताल में 5 माह पहले नवजात बच्चे बदलने का मामला सुलझ गया है। बुधवार को दोनों अमानते अपने-अपने घर अपने सही माता-पिता के पास पहुंच गई। खुशी के माहौल में दोनों परिजनों ने एक दूसरे को बच्चे सौंप दिए। दोनों बच्चों की दोनों मां को जहां बच्चे के बिछड़ने का गम था। वहीं उन्हें अपना बच्चा मिलने की खुशी भी थी।

     5 माह की बेटी जन्नत के आने की खुशी में घर के दोनों छोटे लड़के सार्थक और नैतिक सुबह से ही सजावट में व्यस्त रहे। पूरे घर को रंग बिरंगे गुब्बारांे में सजाने में लगे रहे सार्थक और नैतिक की आंखों में बहन के आने की खुशी और भाई नितांश के जाने का दुख साफ देखा जा सकता था। परिवार में बहन की कमी को महसूस करने वाले दोनों भाईयों ने maa-3बताया कि अभी से ही उन्होंने भाई दूज को लेकर सारी प्लानिंग कर ली है। अभी तक रक्षा बंधन और भाई दूज पर बहन की कमी खलती रही है। लेकिन नैतिक हमेशा उनका तीसरा भाई रहेगा। इसके साथ मिलना जुलना जारी रहेगा।

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     जन्नत के परिवार वालों के लिए ये स्थिति बहुत असमंजस वाली थी। पूरी रात परिवार में शायद ही कोई सोया। वही मां अंजली पूरी रात नितांश को सीने से लगाकर उससे अलग होने की ताकत को जुटाने में लगी रही। बुधवार सुबह होते ही परिवार दोनांे बच्चों के लिए अन्नपाषण हवण की तैयारियों में जुट गया। वहीं मां अंजली ने रोजाना की तरह नितांश को तैयार किया, लेकिन आंखो से आंसू शायद ही थमे हो। वहीं व्यस्ता के बीच परिवार के सदस्य भी बार-बार आकर नितांश को दुलारते रहे।

पिछले जन्म का रिश्ता है नितांश से
maa-4जन्नत के आने की खुशी और नितांश के जाने का गम छिपाते जन्नत के दादा-दादी अपने बेटे और बहु को हौंसला बढाते नजर आए। लेकिन दादी कला ठाकुर के आंखे नितांश के चेहरे को देखकर छलक ही जाती। उन्होंने कहा कि नितांश के साथ जुडा रिश्ता पिछले जन्म का कोई रिश्ता है। इन 5 महिनों में इस पूरे प्रकरण के कारण परिवार मुश्किल दौर से गुजरा है, लेकिन नितांश को लेकर न तो परिवार को प्यार कम हुआ है और ना कभी होगा।

मुझे दोनों बच्चे ही दे दो
अन्न पराशन हवण के दौरान जैसे ही बच्चे बदलने का मौका रहा, मां अंजली के सब्र का बांध टूट गया। नितांश को सीने से लगाकर अंजली ने ये कह कर मुझें दोनों बच्चे ही दे दो, मैं नितांश के बिना नहीं रह सकती, फूट फूट कर रो पड़ी। इससे एकाएक माहौल गमगीन हो गया वहां उपस्थित सभी लोगांे की आंखे भर आई। अंजली ने कहा कि जो परिस्थिति है, उसमें खुशी से ज्यादा दुख है। जबकि वे खुद बच्ची चाहती थी। लेकिन नितांश से जुडा रिश्ता शायद ही कभी टूटेगा। वहीं नितांश की मां शीतल ठाकुर के चेहरे पर कुछ ज्यादा भाव नहीं थे। उन्होंने कहा कि ये खुशी तब ज्यादा होती, अगर नितांश पैदा होते ही उनकी गोद में आता।

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लक्ष्मी के रूप में स्वागत हुआ जन्नत का
5 महीने के बाद अपने घर आई जन्नत का मां लक्ष्मी के रूप में स्वागत किया गया। गृह प्रवेश के पहले जन्नत की आरती मां maa-2और ताई ने की। इसके बाद परिवार ने खुली बाहांे से जन्नत का स्वागत किया। जिसमें बाद दोनों बच्चे के लिए अन्न पराशन हवण किया गया। दोनांे बच्चो ने एक ही कटोरी और चम्मच से खीर खिलाई गई, जिससे दोनों के बीच भाई-बहन का अटूट रिश्ता जोड़ा गया। हवण समाप्ति पर दोनों मांओ ने बच्चों को बदला। इस भावनात्मक पल में कुछ ही देर में दोनों बच्चे एक दूसरे के साथ खेलते नजर आए। मानों दोनांे ने एक दूसरे से रिश्ता बनाते हुए आने वाले भविष्य की नई नींव रख्री हो।

सिद्धार्थ पहली बार मनाएगा भईया दूज
अंजली के जेठ के बेटे सिद्धार्थ ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके घर उनकी बहन रही है। इसलिए वो बहुत खुश है कि पहली बार वह भईया दूज का त्यौहार मनाएगा।

क्या हैं मामला?
गौरतलब है कि कमला नेहरू अस्पताल में शीतल नामक महिला की 26 मई की रात डिलीवरी हुई थी। तब डयूटी पर तैनात नर्स ने उसे बेटा होने की सूचना दी, लेकिन 20-25 मिनट बाद उसे बेटी थमा दी गई। इसके बाद शीतल दंपति ने अपने स्तर पर डीएनए परीक्षण करवाया, जो उसे सौंपी गई बच्ची के साथ मैच नहीं हुआ। इस पर दंपति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसी रात पैदा हुए दो अन्य नवजातों व उनके अभिभावकों का डीएनए परीक्षण हुआ। इसमें इस तथ्य की पुष्ठि हुई कि नवजात बदला गया था। प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई हुई थी। इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता शीतल के अलावा एक अन्य दंपति अंजना को इसे मामले में नोटिस जारी किया और उसे प्रतिवादी बनाया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों में यह तय हो गया कि वे अपने बच्चों को फिर से बदल लेंगे। ताकि दोनों बच्चे अपने सही मां.बाप के पास पहुंच जाए।

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