शांता कुमार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से नाराज, बोले PM के स्वागत में कर रहे राजनीति

नृपजीत निप्पी। धर्मशाला
केंद्र सरकार प्रदेश के विकास में कोई राजनीति नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह प्रधानमंत्री के स्वागत में राजनीति कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्ष में प्रदेश को अनेक तोहफे दिए हैं। पिछले दो वर्ष के दौरान प्रदेश को जो कुछ मिला हैै। वह इतिहास में आज दिन तक प्रदेश को कभी नहीं मिला है। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कांगड़ा चंबा के सांसद शांता कुमार ने धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान कही।

        शांता कुमार ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली की नरेंद्र मोदी सरकार ने दो वर्ष में प्रदेश को इतना कुछ दिया है जितना कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। केंद्र सरकार की इस दरयादिली के लिए सीएम वीरभद्र सिंह को राजनीति से ऊपर उठकर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करना चाहिए था। मगर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने व धन्यावाद करने में गुरेज कर रहे हैं। जोकि उनकी घटिया राजनीति को दर्शाता है।

chauhan

       शांता कुमार ने कहा कि इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि सभी प्रकार के सोफ्ट ड्रिक्स में 5 प्रतिशत फल रस मिलाने का ऐतिहासिक निर्णय केंद्र सरकार ने लिया हैै। जोकि कि प्रदेश के लिए एक वरदान है। उन्होंने कहा कि जो फल बाजार में नहीं आ पाता था। क्योंकि वह फल डिफोरम होता था। ऐसा हजारों करोड़ों का फल खरीदने के लिए अब पेप्सी, कोला जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां बागबान के दरवाजे पर आएगी। शांता ने कहा कि इस मांग को भाजपा पिछल्ले 38 वर्ष से लगातार उठाती रही है। पेप्सी, कोला जैसी कंपनियां इस का लगातार विरोध करती रही। उन्होंने कहा कि 38 वर्ष के बाद भाजपा की यह मांग पूरी हुई है। जिससे यह प्रदेश व फल पैदा करने वाले बागवानों के लिए बरदान साबित होगा।

       शांता ने कहा कि इसके अतिरिक्त नरेंद्र मोदी की सरकार ने प्रदेश को 61 नेशनल हाईवे, एम्स, तीन मेडिकल कालेज व फोरलेन के तोहफे दिए हंै। उन्होंने कहा कि चीन ने 1962 की लड़ाई के बाद हिमालय के उस पार कई रेलवे लाइन व हवाई अड्डे व छावनियां बना ली। लेकिन जोगिंद्र नगर से रेलवे लाइन एक इंच आगे नहीं बढ़ी। शांता ने कहा कि पहली बार नई सरकार आने के बाद भानू पल्ली, बिलासपुर, लेह लदाख, पठानकोट, मंडी व लेह लदाख जैसी दो रेलवे लाइनों पर कम से कम 60 से 70 हजार करोड़ रूपए की लागत आएगी। उन्होंने कहा कि इन दोनों योजनाओं को बजट में शामिल किया गया है। इनका सर्वे भी शुरू हो चुका है। इससे देश की सुरक्षा के साथ ही प्रदेश की तस्वीर भी बदल जाएगी।

negi
Facebook Comments
vishal-garments

Related posts