लीजिए देवभूमि हिमाचल में अब सेब के साथ अनार की भी छाएगी लाली

वीएस पाठक। शिमला
देवभूमि हिमाचल में सेब की तर्ज पर अब अनार की लाली भी जल्द देखने को मिलेगी। चूंकि विश्व भर में सेब उत्पादन में अपनी पहचान रखने वाले हिमाचल प्रदेश को अब सरकार ने अनार उत्पादन को भी एक खास मुकाम दिलाने की तैयारी शुरू कर दी है।

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        प्रदेश के बागवानी विभाग के अधिकारियों ने देवभूमि में अनार उत्पादन को लेकर महाराष्ट्र का दौरा किया है। विभाग ने यहां जानकारी जुटाई कौन-कौन सी अनार की किस्म लगाई जाए। पौधों की उपलब्धता कैसे होगी। बाजार में किस वेरायटी की कितनी डिमांड है। वहीं खाने में कौन से अनार की किस्म बेहतर है। किस किस्म में अच्छा फल लगता है और तकनीक क्या अपनाई जाएगी। मुख्य तौर पर विभाग ने कुल सात किस्मों के पौधों की व्यापक जानकारी ली। महाराष्ट्र में बागवानों के अनुभव जानने के बाद हिमाचल के बागवानी विभाग की टीम ने एक रिपोर्ट तैयार की है।

      जानकारी के अनुसार इस रिपोर्ट को विश्व बैंक को सौंपा गया है। विश्व बैंक के सहयोग से ही देवभूमि के किसानों-बागवानों को अनार की विभिन्न किस्मों के पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे। सरकार प्रदेश के मैदानी इलाकों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए अनार उत्पादन को बढ़ावा देगी। राज्य में 1500 से 1600 मीटर की ऊंचाई पर अनार की अच्छी पैदावार की जा सकती है। दूसरी तरफ वर्तमान में शिमला, कुल्लू, सोलन व सिरमौर जिला के निचले क्षेत्रों में अनार की पैदावार की जा रही है। इन क्षेत्रों में कंधारी, गणेश, चावला व भागवा सहित अन्य कई किस्में तैयार होती है। जिला कुल्लू में बड़ी अनार की बागवानी व्यापक स्तर पर होती है।

       बता दंे कि विश्व बैंक के सहयोग से हिमाचल को 1000 करोड़ रुपए का बागवानी मिशन मंजूर हुआ है। हिमाचल में सालाना 3500 करोड़ रुपए का सेब कारोबार होता है। अब सरकार अनार उत्पादन की तरफ ध्यान दे रही है। उधर हिमाचल में विश्व बैंक के प्रोजेक्ट को देख रहे एक अधिकारी भूपेंद्र नेगी के अनुसार महाराष्ट्र दौरे से वापस लौटने के बाद तैयार की गई रिपोर्ट को विश्व बैंक को भेज दिया गया है।

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