मंडी : रिवालसर झील को फिर मिलेंगी सांसे

न्यूजघाट टीम। मंडी
प्राकृतिक संसाधनों को दूषित करने में मानव ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसका जीता जागता उदाहरण वो प्राकृतिक झीलें, नदियां व पहाड़ है, जो दिन-प्रतिदिन प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। यदि बात हिंदू, सिख व बौद्ध धर्म की संगम स्थली रिवालसर की जाए तो त्रिवेणी के नाम से मशहूर रिवालसर शहर की प्राचीन झील भी प्रदूषण की मार सह रही है। जब झील का अस्तित्व खतरे में पड़ने लगा, तो प्रशासन भी जागा और झील को फिर से सांसें देने की कवायद भी शुरू हुई। इसके लिए जिला प्रशासन ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत जल्द ही झील में कम हो चुकी ऑक्सीजन को बढ़ाने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस बात की पुष्टि डीसी मंडी संदीप कदम ने की है।

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        तीन धर्मों की संगम स्थली रिवालसर में हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के लोग रहते हैं। शहर के बीचों बीच एक प्राचीन झील है, जिसके साथ लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, लेकिन झील की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। इसके कारण झील के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराने लग गए हैं। इस झील में बाहर से भी गंदा मलबा मिल रहा है और गाद की मात्रा इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि झील मात्र 15 फीट गहरी रह गई है। इसके साथ ही झील में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण इसमें ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है। यही कारण है कि प्रशासन ने झील को पुर्नजीवित करने की दिशा में प्रयास करना शुरू कर दिया है।

       झील में कम हो रही ऑक्सीजन को बढ़ाने के लिए इसमें ऑक्सीजन पाइपें डालने का निर्णय लिया गया है। इस प्रकार एक एक्वेरियम में ऑक्सीजन को बरकरार रखने के लिए पाइप लगाई जाती है। ठीक उसी प्रकार से रिवालसर झील में भी ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए पाइपें लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रशासन ने कुछ निजी कंपनियों के साथ संपर्क साधा है और जल्द ही किसी एक कंपनी को यह कार्य देकर झील को सांसें देने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही झील में बढ़ चुकी गाद को निकालने के लिए एक प्रपोजल राज्य सरकार को भेजी गई है और जैसे ही यह प्रपोजल मंजूर हो जाएगी तो इस कार्य को भी शुरू कर दिया जाएगा। वहीं झील में साफ-सफाई, गाद निकासी, कैचमैंट क्षेत्र में पानी निकासी, भूमि कटाव रोकने व मछलियों के लिए फीडिंग की स्थायी व्यवस्था करने के लिए केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने वन विभाग को करीब सात करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं।

         कुल मिलाकर नगर पंचायत ने झील के सौंदर्यीकरण के लिए ढाई करोड़ रुपये का खाका तैयार कर सरकार को मंजूरी के लिए भेजा है। अगर सरकार इसे मंजूर करती है तो निसंदेह झील के दिन जल्द ही अच्छे होंगे।

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