पांवटा साहिब : भाजपा ने ही हमेशा उठाया गिरीपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलवाने का मुद्दा

न्यूजघाट टीम। पांवटा साहिब
गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलाने के लिए भाजपा ने हर संभव कार्य किया है। यह बात शिलाई भाजमुयो के मंड़ल अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर व सोशल मीडिया प्रभारी अर्जुन कपूर ने कहीं। उन्होंने कहा कि लोकसभा में सांसद वीरेंद्र कश्यप और विधान सभा में बलदेव तोमर, सुखराम, सुरेश कश्यप के माध्यम से आवाज उठती रही। केंद्र सरकार के समक्ष पत्राचार के माध्यम से भी अपनी मांग रखी।

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       19 दिसंबर 2011 में सासंद वीरेंद्र कश्यप के नेतृत्व में बलदेव तोमर और हाटी समुदाय के प्रतिनिधी प्रधानमंत्री से मिले। उस में भाजपा ने कुछ हद तक सफलता पाई और सर्वे करने के निर्देश जारी हुए। बलदेव द्वारा विधानसभा में स्थिति जानना चाही, तो पता चला कि सर्वे रिपोर्ट 2014 में ही तैयार हो चुकी है। सरकार ने इसकी लिखित रूप में जानकारी दी कि रिपोर्ट फाइल केंद्र सरकार को नहीं भेजी गई।

      18 मार्च 2016 को सिरमौर के चार विधायकों बलदेव तोमर, विनय कुमार, सुरेश कश्यप व किरनेश जंग ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। सबने आग्रह किया कि जल्द केंद्र सरकार को रिपोर्ट फाइल भेजे। परंतु मुख्यमन्त्री की इस पर कोई रूचि नहीं थी। रिपोर्ट फाइल केंद्र सरकार को नहीं भेजी जा रही थी। इसलिए 18 मई 2016 को राज्यपाल से सांसद वीरेंद्रfile-pic-giripar-1 कश्यप की अध्यक्षता में हाटी समुदाय का प्रतिनिधि एवं जिला सिरमौर के 3 विधायक मिलें और उनसे मांग की कि सरकार पर दबाव बनाए, ताकि प्रदेश सरकार अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द केंद्र सरकार को भेजे, ताकि गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय घोषित करने की काफी समय से चली आ रही समस्या का हल हो सके।

      महामहिम ने सरकार पर दबाव बनाया तब जाकर केंद्र सरकार रिपोर्ट भेजी गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने 1985 और 1994 केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी थी, परंतु नीतिगत कारणों से नहीं हो सका। ऐसे क्या नीतिगत कारण थे कि उस समय गिरिपार जनजातीय घोषित नही हो सका। जबकि 1984 और 1994 में सिरमौर से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस ही कांग्रेस थी। 1984 में तो कांग्रेस की रिकार्ड तोड़ बहुमत थी। फिर क्या कारण रहा।

     भाजपा ने इस मुद्दे को अंतिम छोर तक ला दिया तब कांग्रेस बोल रही है कि भाजपा राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। ये तो वो ही बात हो गई उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। उन्होंने कहा कि राजगढ़ ब्लॉक की 19 पंचायते व पांवटा की 5 पंचायतंे को रिपोर्ट में गिरिपार क्षेत्र से बाहर किया गया। क्या हर्ष वर्धन 16 मई 2016 को मुख्यमंत्री से इसीलिए मिले थे, ताकि गिरिपार को बंटवा सके। हर्षवर्धन चाहते तो रिपोर्ट 2014 में ही केंद्र सरकार को भिजवा सकते थे और 24 पंचायतों को कटने से बचा सकते थे। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा तो नही गंगूराम मुसाफिर के राजनितिक स्वार्थ के कारण हर्षवर्धन ने राजगढ़ ब्लाक की 19 पंचायते कटवाई हो। उन्होंने कहा कि शिलाई कांग्रेस की बातंे हास्यपद है। अगर भाजपा विधायकांे ने मुख्यमंत्री के साथ फोटो ही खिंचवाने थी, तो क्या कांग्रेस के रेणुका विधायक विनय कुमार और पावंटा विधायक किरनेश जंग भी फोटो खिंचवाने गए थे।

     उन्होंने कांग्रेस के नेताआंे को सलाह देते हुए कहा कि वो एक बार विधानसभा का संविधान पढ़ ले। उन्हें ज्ञात हो जाएगा कि नियम 324 में क्या प्रावधान है। कांग्रेस की इसी अधूरी जानकारी के कारण ही तो आज सिरमौर पिछड़े जिलांे में आता है। उन्होंने कहा कि 18 मार्च 2016 को नियम 130 तहत बलदेव तोमर ने विधानसभा में सवाल उठाए थे। उसके तो हम जनता के सबूत पेश कर रहे हैं। परंतु हर्षवर्धन और कांग्रेस भी जनता के समक्ष सबूत पेश करें कि 2005 में प्राइवेट मेंबर रेजूलेशन के तहत इस मसले को उठाया था। विधानसभा की कार्रवाई में ऐसा कुछ नहीं दर्शया गया।

      2002 में केंद्र सरकार को कांग्रेस के माध्यम से रिपोर्ट भेजने की बात कहीं जा रही है। परंतु कांग्रेस ने कैसे रिपोर्ट भेजी। जबकि प्रदेश में उस समय भाजपपा-हिविका की सरकार थी। चोर की दाड़ी में तिनका यहां साफ दिख रहा है। इस मुद्दे पर राजनैतिक रोटिया कौन सेंक रहा है, वह तो जनता ने 2012 में ही बता दिया था और 2017 में भी बता दंेगी।

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