परागपुर में बालिका अनाथाश्रम में दीवाली के दिन चहकी “अनमोल बेटियां”

न्यूजघाट टीम। धर्मशाला
बेटी है अनमोल के दावे ठोंकने वाली सरकारों के दावों पर दीवाली के दिन उस वक्त कील ठुक गई, जब परागपुर के सरकारी बालिका अनाथाश्रम में मायूस बैठी 26 बालिकाओं के चेहरों पर मुस्कान फैल गई। दीवाली के दिन जब समाजसेवी संजय शर्मा अपनी टीम के साथ इनके पास पहुंचे। संजय और इनकी टीम ने बालिकाओं को कंबल, मिठाइयां और पटाखे बांटे।

       यह घटना उस लहजे से और भी खास बन गई, जिसमे एक समाजसेवी संस्था अवाम ने उस रोल को निभाया कायदे से जिसे निभाने का जिम्मा सरकार के कारिंदों और कथित तौर पर खुद को जनता का लीडर बनाने का ठप्पा लगा होता है। यह छब्बीस बेटियां इस त्यौहार पर भी खुद को अनाथ ही महसूस कर रहीं थीं । मगर जैसे ही ओचक संजय अपने टीम के साथ पहुंचे तो मायूसी का माहौल अचानक खुशियों में तब्दील हो गया।

      हैरानी की बात यह है कि यह प्रदेश का एक मात्र ऐसा अनाथ बालिका आश्रम है। इसे खुद सरकार का समाज कल्याण विभाग चलाता है। मगर दुखद पहलु यह है कि सिर्फ रूटीन के काम बालिका हित में होते हैं। त्यौहार जैसे मौके जिनमें बालमन को एक सहारे और चाहतों की जरूरत होती है, तब ऐसा कोई काम सरकारी तौर पर नहीं होता जिससे इन बच्चियों को खुद के खास और अनमोल होने का अहसास होता हो।

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      खैर, अवाम की टीम ने अपने नाम को सार्थक करने के साथ ही जिस तरह से इन बालिकाओं को अनमोल होने का अहसास करवाया है, उससे आम समाज में संस्था को खूब सराहना मिल रही है। इस मौके पर संजय के साथ, जग्गू नौरिया, सुनील कश्यप, हंसराज समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अवाम ने अपने इस काम से यह भी साबित कर दिया कि सब अगर थोड़ा-थोड़ा जरूरतमंदों के लिए अहसास भी रखें तो दुनिया में कोई भी खुद को अकेला नही समझेगा।

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