किन्नौर में वन अधिकारों के लिए विशाल प्रदर्शन

न्यूजघाट टीम। शिमला
वन अधिकार कानून को लागू करने के लिए रिकांगपियो में किनौर के आदिवासियों ने विशाल प्रदर्शन किया। इससे पहले रामलीला मैदान में जनसभा का आयोजन किया गया। अंबेदकर भवन से नारे लगाते हुए जूलुस रामलीला मैदान पहुंचा। यहां पर विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।

      इस प्रदर्शन में किनौर की सभी ग्राम पंचायतों से लोग शामिल हुए। प्रदर्शन में प्रदेश भर से आए हिमालय नीति अभियान के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। प्रदर्शन व रैली में खान-खनन एवं लोग संगठन के राष्ट्रीय महासचिव अशोक श्रीमाली और राष्ट्रीय वनजन श्रमजिवी यूनियन की उपमहासचिव रोमा मलिक ने विशेष रूप से भाग लिया।

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      जनसभा को संबोधित करते हुए श्रीमाली ने कहा कि हिमाचल में सरकार ने हजारों हैक्टर वन भूमि जल विद्युत परियोजनाओं, खनन व दूसरे उद्योगों के लिए कानूनों की अवहेलना करते हुए लुटवाई। जबकि स्थानीय आदिवासी व वन निवासियों के वैधानिक परंपरागत वन अधिकारों को प्रदान करने में अवरोध खड़े किए जा रहे हैं। रोमा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सत्तासीन है व यह कानून यूपीए सरकार द्वारा ही बनाया गया है।

     लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज कानून के पारित होने के दस साल के बाद अभी तक तक कानून का पालन नहीं किया गया है। लगता है कि सरकार वनविभाग व कंपनियों के दबाव में है। वनाधिकार कानून के लागू होने से वन विभाग की सत्ता छीन सकती है। कंपनियों को प्रोजेक्ट लगाने के लिए जमीने मिलना मुश्किल होगा। अब वक्त आ गया है कि जनता ही इन जनहित कानूनों को लागू करने के लिए लामबंद हो। वनाधिकार कानून के दस वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देश के तमाम जनसंगठन द्वारा भूमि अधिकार आंदोलन के तहत 15 दिसंबर को जंतर मंतर दिल्ली में एक विशाल जनप्रर्दशन कर इस कानून को देश भर में लागू करने व एक देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने की तैयारी की जाएगी।

     हिम लोक जागृति मंच के संयोजक आरएस नेगी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किनौर में हजारों वन अधिकार के दावे पिछले कई सालों से उपमंडल समिति के पास पड़े हैं। लेकिन उन पर अभी तक कोई भी फैसला नहीं लिया गया। जबकि उच्च न्यायालय की आड़ में वन विभाग ने उन दावेदारों पर नाजायज कब्जे के मुकदमें दायर किए और उन्हें बेदखली के नोटिस दिए जा रहे हैं।

      मुख्य सचिव ने पिछले दिनों जिलाधीश किनौर को वन अधिकार कानून को तुरंत लागू करने का पत्र लिख कर आदेश दिया। लेकिन जिला प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। यह खुले आम वन अधिकार कानून की अवहेलना की है। किनौर व हिमाचल के वन निवासी इस अन्याय का विरोध करेंगे और आंदोलन करके अपना वन अधिकार हासिल करके रहेंगे।

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