कमला नेहरू अस्पताल में बच्चों की अदला-बदली के मामले में हाईकोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट

न्यूजघाट टीम। शिमला
राजधानी में स्थित कमला नेहरू मातृ एवं शिशु अस्पताल में नवजात बच्चों की अदला-बदला के मामले में पुलिस ने वीरवार को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है। एसपी शिमला द्वारा हाईकोर्ट में सौंपी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि अस्पताल में बच्चो की अदला-बदली हुई थी। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मंसूर अहमद मीर व न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष हो रही है।

     सनद रहे कि हाईकोर्ट ने दंपत्ति की याचिका पर एसपी शिमला को जांच का जिम्मा सौंपा था। हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश होने के बाद मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने अंजना व जितेंद्र ठाकुर को प्रतिवादी बनाया है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी। अंजना व जितेंद्र ठाकुर को शुक्रवार को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा गया है।

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     दूसरी तरफ एसपी शिमला की तरफ से हाईकोर्ट में पेश की गई जांच रिपोर्ट में बताया गया कि सीएफएस लैब जुन्गा के डीएनए डिवीजन के सहायक निदेशक से पुलिस को मिली रिपोर्ट के मुताबिक बदले गए बच्चे (लडके) का डीएनए याचिकाकर्ता शीतल व अनिल कुमार के डीएनए से मिलता है। दूसरी तरफ बेबी शीतल यानी लड़की का डीएनए शिकायतकर्ता दंपत्ति से नहीं मिलता है। बेबी शीतल का डीएनए अंजना व जितेंद्र ठाकुर के डीएनए से मैच करता है।

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     जांच अधिकारी के अनुसार उन्होंने केएनएच के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से उन डॉक्टरों के नाम व पते देने को भी कहा है, जिनकी तैनाती डिलीवरी वाले दिन यानी 26 मई 2016 को लेबर रूम में थी। लेबर रूम में अंदर व बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की 26 मई शाम 5 बजे से 27 मई शाम 8 बजे तक की फुटेज उपलब्ध करवाने को भी कहा गया है। कुछ मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी मोबाइल कंपनियों से मांगी गई है। यह जानकारी अभी आना बाकी है।

क्या हैं मामला ?
यहां बता दें कि इसी साल 26 मई को कमला नेहरू अस्पताल में शीतल ने एक बच्चे को जन्म दिया था। मौके पर मौजूद नर्सों ने उससे कहा था कि उसके बेटा हुआ है परंतु बाद में उसे बेटी थमा दी गयी। दोनों प्रार्थियों शीतल व अनिल ने अपने स्तर पर डीएनए करवाया तो लडकी का डीएनए उनसे नहीं मिला। बाद में वे हाईकोर्ट पहुंचे।

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