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कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में क्यों मंडरा रहे खतरे के बादल, जानने के लिए पढ़े

न्यूजघाट टीम। कालाअंब
प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में शूमार कालाअंब में औद्योगिकरण पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। प्रदेश को औद्योगिक पैकेज मिलने की टूटी उम्मीद व सीएसटी कर की दरों में वृद्धि के चलते कालाअंब से औद्योगिक इकाइयों का धीरे-धीरे पलायन शुरू हो चुका है। प्राप्त आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2०14 में करीब तीन दर्जन लघु उद्योगों ने कालाअंब से अपना नाता तोड़ दिया है। वहीं इस वर्ष भी करीब 15 से 20 उद्योगों ने उत्पादन बंद कर कामगारों के साथ आपसी समन्वय से अपना सेटलमेंट किया है।

      हालांकि अभी उद्योग विभाग कालाअंब की फाइलों में इन उद्योगों की वर्तमान स्थिति चालू ही दर्शाई जा रही है। जिन औद्योगिक इकाईयों की एक से अधिक कंपनी कालाअंब में स्थापित थी, उनमें से पैकेज खत्म होने वाले उद्योगों में प्रोडक्शन बंद कर दी गई है। कई कपंननियों ने उन्हें किराए पर देने के लिए राजस्व विभाग से अनुमति के लिए आवेदन भी किया है। जहां पहले ही मूलभूत सुविधाओं के अभाव से कालाअंब से उद्योगपतियों का मन उब चुका था। वहीं अब साल दर साल पैकेज मिलने की उम्मीद भी दम तोड़ चुकी है।

      हैरानी की बात तो यह है कि पिछले सालों के मुकाबले कालाअंब में दो वर्ष में मात्र 15 उद्योगों नेे ही दस्तक दी है। जबकि इस वर्ष यह आंकडा पूरी तरह निल ही चल रहा है। इसको लेकर जिला उद्योग विभाग के माथे पर चिंता झलकने लगी है। हालकि गत माह पूर्व ही इस परिस्थिति को सुधारने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सराहनीय कदम उठाए गए। परंतु वह भी इस डूबते जहाज को तारने में नाकाफी ही साबित रहे।

    यदि लघु उद्योग भारती के जिला अध्यक्ष की मानें तो उनका कहना है कि कालाअंब में औद्योगिकरण पर गहराए संकट के लिए प्रदेश स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है। अगर यही हालात रहे तो आने वाले वर्ष 2०16 तक कालाअंब से करीब सौ की संख्या में लघु उद्योग पलायन कर जाएंगे। मौजूदा हालात मे कालाअंब के दर्जन भर लघु उद्योग दम तोड़ चुके है व दर्जनों बड़े उद्योग घाटे की अवस्था में सांसे ले रहे है और इनकी सांसे कभी भी बंद हो सकती है।

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कालाअंब में उद्योगों के पलायन से क्या होगा नुकसान
किसी भी क्षेत्र का विकास उस क्षेत्र में रोजगार के अवसरो पर निर्भर करता है। जहां रोजगार होता है, वही जीवन को रफतार मिलती है। कालाअंब में उद्योगों की मौजूदगी से करीब पच्चास हजार से भी अधिक लोगांे को रोजगार प्राप्त हो रहा है। यदि पलायन बंद नहीं हुआ तो कालाअंब के युवा बेरोजगार हो जाएंगे। रोजगार नहीं होंगे, तो कामगार नहीं होंगे। कामगार नहीं होंगे तो स्थनीय लोगों के मकानों में कोई किराएदार दस्तक नहीं देगा। वही उद्योगों के साए में अपनी दुकानदारी कर रहे हजारों दुकानदारों को भी घाटा झेलना पड़ सकता है। साथ ही जिन लोगों ने कर्ज पर दुकान खोली है, वे भी आर्थिक संकट से घिर जाएंगे। साथ ही बेरोजगारी से क्षेत्र में समाजजिक बुराईयां जन्म लेने लगेंगी। वही अपराध भी तेजी से बढ़ने लगेगा। इसके अलावा कालाअंब मंे विकास की रफतार बेशक धीमी हो, परंतु हालात के चलते वह भी दम तोड़ जाएगी। वहीं सरकारी राजस्व को घाटा पहुंचना भी लाजमी है। इतना ही नहीं जिला सिरमौर की अर्थव्यवस्था में कालाअंब एक कर्मशियल क्षेत्र के रूप में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। यदि कालाअंब के औद्योगिकरण की रक्षा नहीं हो पाई तो जल्द ही कालाअंब से औद्योगिक क्षेत्र लुप्त हो जाएगा।

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