विशेष: हिमाचल और उत्तराखंड में लगे उद्योग अजमंजस की स्थिति में

विनोद शर्मा !
गुड्स एवम सर्विस टैक्स बिल सदन के दोनों हाउसेस में पास हो चुका है। पर हिमाचल व उत्तराखंड में लगी औद्योगिक इकाईयां, जिन्हें केंद्रीय उत्पाद  शुल्क और बिक्री कर में छूट प्राप्त है, उनके भविष्य के विषय में न केवल केंद्र सरकार खामोश है, बल्कि राज्य सरकार भी उदासीन। हिमाचल व उत्तराखंड में बहुत से लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योग लगे हैं, जो प्रतिष्टित बहुराष्ट्रीय व बड़ी औद्योगिक इकाईयों के लिए कार्य करती हैं। ये राज्य के विकास और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
       GST के मौजूद जारी मॉडल ड्राफ्ट एक्ट में उपरोक्त छूट को जारी रखने व न रखने संबंधी कोई प्रावधान अथवा टिपणी नहीं की गई है। जाहिर सी बात है कि केंद्र सरकार ने इसे राज्य की सिरदर्दी समझ कर मुख्य बिंदु से बाहर रखा है। परंतु राज्य सरकार को इस संदर्भ में न केवल गहनता से, बल्कि शीघ्र अति शीघ्र सोचना पड़ेगा। अन्यथा हिमाचल व उत्तराखंड जैसे राज्य जहां रसद परिवहन, भंडारण व निम्नतम आधारिक संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) का बहुत अभाव है से उद्योगों का पलायन शुरू हो जाएगा और इसमें कोई अतिशोयिक्त नहीं होगी कि होना शुरू हो गया होगा। बहुत सरल सी बात है कि हरियाणा, पंजाब व दिल्ली से जुड़े क्षेत्रों में कच्चे मॉल से लेकर तैयार मॉल के परिवहन व भंडारण की बहुत अच्छी सुविधाएं हैं, जबकि हिमाचल व उत्तराखंड में पहाड़ी इलाके होने की वजह से न केवल इन सुविधवों का अभाव है,अपितु विभिन्न क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट यूनियंस की मौजदगी भी बहुराष्ट्रीय कंपनीज को हमेशा खलती है।
      इन ट्रांसपोर्ट यूनियंस के पास उचित कोटी के ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स जैसे की क्लोज्ड बॉडी ट्रक्स, रेफ्रेजरटेड वेन्स आदि का आभाव है या कहे कि हैं ही नहीं। न ही ये इनको बाहर से लेने देते हैं या फिर बहुत जुर्माना तय करके परमिशन देते हैं। सरकार इस संदर्भ में बीते कई वर्षों से कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। हिमाचल व उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से भी कठिन क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं। इसकी वजह से कई सुविधाओ का आभाव रहता है। उद्योग किसी भी राज्य के रोजगार सृजन में मुख्य भूमिका निभाते हैं। पर कमोवेश सरकार दौरा लाई गई प्रतिकूल पॉलिसीस की वजह से बीमार होने की दहलीज पर पहुंच जाते हैं।
      गुड्स एवम सर्विस टैक्स एक्ट बहुत ही लाभकारी और व्यापारिक दृष्टि से सुगम है। पर जैसा की मैंने पहले कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड में इंडस्ट्रीज, इसलिए बहुत तेज गति से विकसित हुई, क्योंकि यहां पर 10 साल यानि 2020 तक केंद्रीय उत्पाद शुल्क में छूट प्राप्त थी। पर GST एक्ट को पारित करते हुए वर्तमान उद्योगों जोकि इन दुर्गम क्षेत्रों में लगे हैं की समस्यायों पर ध्यान नहीं रखा गया है, जिसका इन राज्यों के विकास पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। औद्योगिक इकाईयां भारी मात्रा में पलायन कर सकती हैं। बीमार हो सकती हैं। वित्तीय इकाइयों के NPA में इजाफा हो सकता  है। भारी मात्रा में प्रदेश की जनता बेरोजगारी का सामना कर सकती है।
      प्रदेश सरकार को चाहिए कि वो वर्तमान उद्योगों के हित में शीघ्र अति शीघ्र ठोस कदम उठाए। बुनियादी सुविधा जैसे सड़कें, पाॅवर, भंडारण, परिवहन की सुविधाओं ट्रांसपोर्ट यूनियंस पर नियंत्रण व केंद्र सरकार से बात करें कि मौजूदा छूट को जारी रखने संबंधी नोटिफिकेशन जारी करें और उसको GST के चलते किस तरह से इन उद्योगों तक पहुंचाया जाएं, इस बारे में भी विज्ञप्ति जारी की जाए, ताकि उद्योगों में अजमंजस की स्थति खत्म हो।
                                                                                                                            लेखक विनोद शर्मा , जियोन लाईफ साईंस में महाप्रबंधक हैं । 
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