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हमारी संस्कृति में लड़का-लड़की में नहीं कोई भेद, बोले राज्यपाल आचार्य देवव्रत

न्यूजघाट टीम। शिमला
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि नाटक मनोरंजन के साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से समाज की बुराइयों को उजागर किया जाता है, ताकि हम संगठित होकर इनके खिलाफ लड़ सकें। राज्यपाल गत देर सांय शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में फिल्मफोट फोर्म की ओर से बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ विषय पर मंचित नाटक के अवसर पर बोल रहे थे।

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      आचार्य देवव्रत नाटक के संवेदनशील विषय और पात्रों के अभिनय से प्रभावित हुए और उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी दमदार प्रस्तुति ने समाज की इस गंभीर समस्या के प्रति लोगों को सोचने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज के लिए इस तरह के नाटकांें की आवश्यकता दुर्भाग्यपूर्ण हैं, लेकिन ज्यादातर पढ़ा-लिखा तबका ही इस बुराई से प्रभावित है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के लाहुल-स्पिति जिले में लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक है। साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लिंग अनुपात में अंतर है और यह विषमता समाज के संतुलन को बिगाड़ सकती है।

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