हिमाचल के सिंघम के तबादले के मामले में हाईकोर्ट से याचिका खारिज, पढ़े क्या हैं पूरा मामला ?

न्यूजघाट टीम। शिमला
खनन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद सुर्खियों में आए युवा आईपीएस गौरव सिंह के तबादले को चुनौती देने वाली याचिका वीरवार को वापस ले ली गई। दरअसल बुधवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिका दायर करने वालों से यह पूछा था कि वह इस तरह की जनहित याचिका दायर करने की कैसे योग्यता रखते हैं। जबकि यह एक सरकारी सेवाओं से जुड़ा मामला है।

     वीरवार को हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के कुछ ही देर बाद याचिका दाखिल करने वालों ने फिर से याचिका दाखिल करने की परमिशन मांगते हुए पहले वाली याचिका को वापिस ले लिया। इस पर भी हाईकोर्ट ने उक्त याचिका को खारिज कर दिया। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडीपीठ के समक्ष हुई। बता दें कि युवा आईपीएस गौरव सिंह बद्दी में बतौर एएसपी तैनात थे। वहां उन्होंने खनन माफिया के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की और 170 मामलों में 25 लाख रुपए जुर्माना वसूल कर सरकारी खजाने में जमा करवाया। उन्होंने अन्य कई मामले भी सुलझाए। उनकी सख्ती से खनन माफिया व अपराधियों में खौफ पैदा हुआ।

     इसी बीच उन्होंने बद्दी के विधायक रामकुमार की पत्नी का टिप्पर बिना कागजात के चलते हुए जब्त किया। स्थानीय विधायक ने आईपीएस अधिकारी गौरव सिंह के तबादले को लेकर डीओ नोट भेज। यही नहीं बाद में विधायक स्वयं इस मामले में मुख्यमंत्री से मिले। इसके बाद गौरव सिंह का तबादल बद्दी से धर्मशाला कर दिया गया। अधिकारी के तबादले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए बद्दी के आरटीआई कार्यकर्ता राजीव कुमार कौंडल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। गुरूवार को याचिकाकर्ता ने फिर से याचिका दाखिल करने की अनुमति मांगते हुए उसे वापिस लिया, जिस पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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