देवभूमि के शहरों में युवाओं को अब नहीं भटकना पड़ेगा रोजगार के लिए, जानें कैसे?

न्यूजघाट टीम। शिमला
हिमाचल प्रदेश में अब शहरों में बेरोजगारांे को काम करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अब शहरों के साथ जुड़े नए क्षेत्रों के लोगों को भी मनरेगा की तरह रोजगार मिलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा मनरेगा की तर्ज पर लाल बहादुर शास्त्री कामगार एवं शहरी आजीविका योजना (लक्ष्य) लागू की है। इस मामले में शहरी विकास विभाग द्वारा अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। विभाग के अनुसार फिलहाल यह योजना तीन सालों के लिए होगी। सनद रहे कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बजट भाषण के दौरान शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध करवाने के इरादे से इस घोषणा को शुरू करने का ऐलान किया था। इस योजना के तहत मनरेगा की तरह की लोगों के रोजगार कार्ड बनेंगे। यह कार्ड नगर निगम व नगर निकायों में तैयार किए जाएंगे। दूसरी तरफ शहरी विकास विभाग के अनुसार पिछले महीने ही योजना की अधिसूचना जारी की गई है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं। निसंदेह हिमाचल में यह एक नई योजना शुरू की गई है, जिसके जरिये हिमाचल के हजारों लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
70 प्रतिशत राशि होगी कामगारों पर खर्च
विभाग के मुताबिक लक्ष्य योजना के तहत 70 प्रतिशत राशि कामगारों व 30 प्रतिशत राशि मैटीरियल पर व्यय की जाएगी। इस योजना को नगर निकायों के सभी विलय किए गए वार्ड व नवनिर्मित नगर पंचायतों में लागू किया जाना है।
नई नगर पंचायतों को मिलेंगे 10 लाख
योजना के तहत नई नगर पंचायतों को सरकार 10 लाख रूपए देगी। जबकि नगर निगम में मर्ज किए गए प्रति वार्ड को रोजगार के लिए 10 लाख रूपए मिलेंगे। इसमें बेरोजगारों को 200 से 250 दिन का रोजगार मिल सकता है।

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