क्या आप जानते हैं ? कालाअंब में भी हैं प्राचीन किला, देखें तस्वीरें, पढ़े इतिहास

ऐतिहासिक धरोहर के सौंदर्यकरण को लेकर राजघराने ने संभाली कमान, रंग बिरंगी रोशनी में नहा किला

न्यूजघाट टीम। कालाअंब
जिला मुख्यालय नाहन में शाही महल के बारे में तो सभी ने सुना होगा, लेकिन शायद यह बहुत कम ही लोग जानते हैं कि नाहन से 17 किलोमीटर की दूरी पर औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में भी एक प्राचीन किला मौजूद है। इस ऐतिहासिक धरोहर की वजूद बचाने व इसका सांैदर्यकरण करने के लिए अब राजघाने ने कमान संभाल ली है। शाही परिवार द्वारा इस प्राचीन किले के सौंदर्यकरण के चलते अब इस किले की तस्वीर बदलनेkila-2 लगी हैं।

      रंग-बिरंगी रोशनी से इस किले के कमरे नहाने लगे हैं। आज के इस आधुनिक युग में सिरमौर रियासत की कई धरोहर अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही है। मगर कालाअंब में चारों दिशाओ की पैरवी करता यह प्राचीन किला आज भी अपने अस्तित्व को बरकरार रखे हुए है। जरा सी मेहनत के चलते अब यह किला निखरना शुरू हो गया है। इन दिनों राजघरानों के सदस्यों द्वारा शाही किले का जीर्णोद्धार का कार्य चलवाया जा रहा है। इसमें राजशाही कमरों मे दोबारा नया फर्श डल चुका है।

     हालांकि दीवारों को नए पेंट से ढक दिया गया है। पुराने दरवाजों पर पॉलिश करवा कर उन्हें नया लुक देने की कोशिश की जा रही है। वहीं राजशाही कमरे में सामने लगे रंग बिरंगे शीशो से छन कर आ रही रंग बिंरगी रोशनी आज भी उस वक्त के राजाओं की शान ओ शोकत को बया करती देखी जा सकती है।

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     उस वक्त के शाही कमरों में स्नान ग्रह देख कर हर किसी की आंखे हैरानी से खुल जाती है। बताया जा रहा है कि इस किले के बड़े मैदान को जल्द ही कोमल हरी घास व फूलों के पौधांे से सजाया जाएगा। कयास लगाए जा रहे है कि शायद किले को जल्द ही एक मॉडन लुक दिया जा सकता है। बता दें जब सिरमौर के महाराजा फतह प्रकाश द्वारा नाहन की सुरक्षा पर निगरानी हेतु सन 1875 में अढाई एकड़ क्षेत्र में इस भव्य किले का निर्माण करवाया गया था, उस समय राजशाही परिवारों के लिए भी इसमें दो शाही भवनों का निर्माण किया गया था, ताकि बाहरी राज्यों ये आने वाले शाही कारवां यहां रूके, तो उन्हें रॉयल कमरों में ठहराया जाता था। कालाअंब किला तत्कालीन राजा की दूरदर्शित सोच का जीता जागता उदाहरण है, जोकि चाहते थे कि सिरमौर की सीमाओं को गंभीरkila-4 बीमारीयों से सुरक्षित रखा जाए। इसके लिए उन्होंने बाहरी राज्यों से आने वाले कॉरवाओं को इस किले में रूकने के लिए आदेश दिए व इन कारवां में शामिल लोगों का मैडीकल चैकअप करवाने के साथ-साथ उनके कपड़ों को खोलते पानी में धुलवाने के निर्देश भी दे रखे थे।

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     राजा फतेह प्रकाश सिंह नाहन को साफ-सुथरा व रोग मुक्त रखना चाहते थे, जिसके लिए इस प्रकार के इंतजाम कालाअंब में किए गए। अब इस परंपरा को पुन जीवित करना तो संभव नहीं, परंतु इस इमारत को पुन जीवित किया जा रहा है। इसे देख कर आसपास के लोग खुश है। लोगांे का कहना है कि इस किले की मरम्मत से यहां अपराधिक व जीव जंतुओ का खौफ नहीं सताएगा। साथ इस इमारत को कर्मिशयल पैलेस के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चंूकि ये संपति अब राजघराने के वारिसों की निजी संपति है, इसलिए लोगांे ने इसके जनहित में इस्तेमाल की आस तो छोड़ दी है, परंतु कालाअंब की शान का प्रतीक इस किले के जीर्णोद्धार से लोगो में खुशी की लहर है। 

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