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सिरमौर के गोपाल हाब्बी उस्ताद बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार से विभूषित

गोपाल हाब्बी को मेघालय में राज्यपाल द्वारा किया गया सम्मानित

अंजलि त्यागी

नाहन। सिरमौर की संस्कृति के सरंक्षण व संर्वधन के लिए पझौता घाटी के गांव जालग से गोपाल सिहं हाब्बी को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से विभूषित किया गया।
यह पुरुस्कार संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली द्वारा युवा वर्ग में वर्ष 2017 के लिए प्रदान किया गया।

मेघालय की राजधनी शिलांग के यू सोसो थाम सभागार में गत 14 सिंतबर को संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार के सौजन्य से आयोजित सम्मान समारोह में मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय द्वारा देशभर के विभिन्न विधओं से जुड़े 31 उत्कृष्ट कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जिसमें से लोक व जनजातीय कलाओं में देशभर में आठ युवा कलाकारों सहित गोपाल हाब्बी को भी यह पुरस्कार प्राप्त हुआ।

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इस सम्मान समारोह में इन पुरस्कारों में राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस सम्मान का नाम उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के नाम रखा गया है। बिस्मिल्लाह खां एक मात्रा ऐसे कलाकार हुए जिन्होने शहनाई को मंचीय साजों में स्थान प्रदान किया इससे पहले शहनाई वादन मात्रा विवाह आदि मांगलिक कार्य पर ही किया जाता था परन्तु बिस्मिल्ला खां साहब ने शहनाई को वो स्थान प्रदान किया जो अब तक किसी ने नहीं दिया था।

उन्होने लोक कलाकरों से आग्रह किया कि  आप भी अपनी कला के क्षेत्रा में उत्कृष्ट कार्य करके अपनी कला को देश-विदेश तक पहुंचाएं।

अध्यक्ष संगीत नाटक अकादमी शेखर सेन ने अपने संबोधन में सम्मानित कलाकारों से यह आग्रह किया कि इस सम्मान प्राप्त करने के बाद आप सभी की यह जिम्मेवारी बनती है कि आप अपनी कला के क्षेत्रा में और अध्कि मेहनत से कार्य करें। आप सभी कलाकार आज तक एक क्षेत्रा विशेष के कलाकार थे परन्तु अब आप पूरे देश के कलाकार बन चुके है इसलिए आपकी जिम्मेवारी अब बढ़ गई है कि आप अब और लग्न और मेहनत से काम करें।

इस अवसर पर सचिव संगीत नाटक अकादमी रीता स्वामी चौधरी, निदेशक संस्कृति विभाग, मेघालय सरकार व अकादेमी कार्यकारिणी सदस्यों सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले  वर्ष 2016 के लिए सिनियर वर्ग में विद्यानन्द सरैक को राष्ट्रपति द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पुरस्कार  प्रदान किया जा चुका है। युवा कलाकार गोपाल हाब्बी ने युवा वर्ग में यह पुरस्कार पाप्त करके सिरमौर की विलुप्त हो रही कलाओं के लिए सम्मान प्राप्त किया है।

इस सम्मान के बारे में गोपाल हाब्बी का कहना है कि यह सम्मान प्रदान कर अकादमी ने मुझे ही नहीं बल्कि जिला सिरमौर सहित पूरे प्रदेश को सम्मान दिया है। हाब्बी ने यह बताया कि मैं पुरस्कार चयन समिति का आभारी हूं जिन्होने हमारे क्षेत्रा की लोक कलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया है।
यह सम्मान उन तमाम कलाकारों के लिए है जो इस विधा से जुडे़ हुए हैं। गोपाल ने बताया कि इस सम्मान का वास्तविक श्रेय डॉ प्रेम शर्मा पूर्व निदेशक भाषा संस्कृति विभाग, लोक सहित्यकार विद्यानन्द सरैक व मेरे बडे़ भ्राता जोगेन्द्र हाब्बी को जाता है जिनके सानिध्य में मुझे विभिन्न लोक विधाओं की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला तथा चुड़ेश्वर मण्डल के लोक कलाकारों का भी अमूल्य सहयोग प्राप्त हुआ।

उन्होने कहा कि वह हिमाचल प्रदेश के तमाम उन दर्शकों का धन्यवादी हूं जिन्होने हमारे द्वारा तैयार दी गई प्रस्तुतियों को सराहा और मेरा उत्साह बढ़ाया जिससे प्रेरणा लेकर मैं निरंतर कार्य करता रहा।

गौरतलब है कि गोपाल हाब्बी लोक नृत्य, लोक नाट्य अभिनय के साथ सिंहटू व भड़ाल्टू नृत्यों के गीतों का गायन व नृत्य करने के साथ इसके परिधानों का निर्माण भी लगभग पिछले बारह वर्षो से करते आ रहे है।

पहले सिंहटू नृत्य के परिधानों का निर्माण किया और इसके पश्चात् इसके मुखौटे बनाना शुरू किये और गायन, नृत्य के साथ परिधन व मुखौटा का निर्माण स्वयं करने में सक्षम हुए। विद्यानन्द सरैक और जोगेन्द्र हाब्बी के निर्देशन में भड़ाल्टू नृत्य के परिधनों का निर्माण स्वयं अपने हाथों से करके इस विलुप्त आदिमनृत्य विधा के संरक्षण में सहयोग प्रदान किया है।

चुड़ेश्वर मण्डल के सहयोग से इन विलुप्त हो रहे नृत्यों के परिधान बना कर भारतवर्ष में अनेक राज्यों में सिरमौरी नाटी के साथ-साथ इन विलुप्त हो रहे नृत्यों की इसकी सफल प्रस्तुतियां दी जा चुकी है।

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