गुरु की शरण में आते ही प्राप्त हो जाती है जीवन-मुक्ति

निरंकारी भवन दाड़लाघाट में विशाल सत्संग का आयोजन

न्यूज़घाट टीम। दाड़लाघाट

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स्थानीय निरंकारी भवन दाड़लाघाट में विशाल सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग की अध्यक्षता दाड़लाघाट ब्रांच के संयोजक शंकर दास निरंकारी ने की। उन्होंने निरंकारी सद्गुरु माता सविन्द्र हरदेव सिंह जी महराज के प्रवचनों को सुनाते हुए कहा की संत निरंकारी मिशन एक आध्यत्मिक विचारधारा है। यह कोई प्रचलित धर्म या सम्प्रदाय नहीं है। यही कारण है कि मिशन में हर धर्म-सम्प्रदाय, देश-भाषा,वेशभूषा वाला व्यक्ति स्वंय को सहज व आनंदमय स्थिति में पाता है।

शंकर दास निरंकारी ने जीवन-मुक्ति की अमर अवस्था पर फरमाते हुए बताया की जब इन्सान अपने मन का अभिमान छोड़ कर गुरु की शरण में आ जाता है, तो उसको एक पल में जीवन-मुक्ति प्राप्त हो जाती है। जीवन-मुक्ति का भाव है इस संसार में रहते हुए परब्रह्म परमत्मा में अभेद हो जाना व इसको अपना बना लेना। दुनिया तो समझती है की इस शरीर के होते हुए मुक्ति हो ही नहीं सकती, जीते जी आत्मा परमत्मा की हो ही नहीं सकती। मुक्ति पाने के लिए काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से भरे शारीर को त्यागना पड़ता है। जरुररत शारीर त्यागने की नहीं, उपरोक्त इन विषयों को त्यागने की है। त्यागने का मतलब इन्हें खत्म करना नहीं, बल्कि इन पर काबू पाना, इन्हें अपने वश में करना, इनको अपनी मर्जी से चलाना है। जीवन मुक्ति की ऐसी अमर अवस्था सद्गुरु की कृपा से ही मिलती है। इससे पहले श्रद्धालुओं ने गीतों व विचारो से अपने विचार प्रकट किये। सत्संग का संचालन देवी राम ने किया। इस मौके पर संयोजक शंकर  दास निरंकारी, संचालक दिनेश गुप्ता,शिक्षक नरेंद्र कुमार, निशांत, आशीष गुप्ता, पून्नू राम, विद्यासागर, सुशील,जट्टूराम, पूरनचंद, यशपाल, सुखराम,रमेश, सुशील, भोलू, बॉबी, नरेश,शिवराम, संतोष, सुखदेई, लता, मधु,नेहा, रीना, बंती, सुरेशी, रेखा, आशु,इंदु, सुनीता सहित करीब 150 निरंकारी समुदाय के अनुयायियों सत्संग में उपस्थित रहे।

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