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सिविल अस्पताल में डॉक्टर नही लिख रहे जेनरिक दवाइयां

बच्चे को लिखी 2300 की दवाइयां, तीमारदार के उड़े होश

नरेश पाबूच। पावंटा साहिब

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सिविल अस्पताल पावंटा साहिब में सरकार के सख्त हिदायत के बाद भी अधिकतर डॉक्टरों द्वारा जेनरिक दवाइयां न लिखकर महंगी दवाइयां लिखी जा रही है ।

जानकारी के अनुसार पांवटा साहिब, शिलाई क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से सस्ते इलाज के लिए गरीब व्यक्ति इलाज करवाने सिविल अस्पताल पांवटा साहिब पहुंचते हैं। परंतु यहां अधिकतर डॉक्टर चेकअप के बाद महंगी दवाओं का पर्चा देते है, तो गरीब लोग प्राइवेट मेडिसीन की दुकानों से यह महंगी दवाइयां लेने के लिए लाचार हो जाते है।

जबकि सरकार द्वारा अस्पताल परिसर में निःशुल्क दवाइयों का औषधालय खोला गया है। फिर सवाल यह उठता है कि क्या डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयां सरकारी औषधालय में उपलब्ध नहीं होती ? लेकिन औषधालय में कार्यरत फार्मासिस्ट सतीश का कहना है कि आम बीमारियों की 96% दवाइयां यहां उपलब्ध है।

तो फिर डॉक्टर इतनी महंगी दवाइयां क्यों लिख रहे है ? जो सरकारी डिस्पेंसरी में उपलब्ध नही है।

क्या कहते है लोग

बलदेव ठाकुर शिलाई का कहना है कि मंगलवार को अपने बच्चे का चेकअप करवाने गया था। डॉक्टर ने जो मैडिसिन लिखी वह सरकारी डिस्पेंसरी में उपलब्ध नही थी।

अस्पताल परिसर में उपल्बध प्राईवेट दुकान में ये दवाएं 2300 रुपये की मिली। कई लोगों का यही कहना है। सरकारी दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं। बहार से बहुत महंगी मिलती है। लेकिन मजबूरन हमे लेनी पड़ती है।

क्या कहते है एसएमओ प्रभारी

एसएमओ प्रभारी सिविल अस्पताल डॉक्टर संजीव सहगल का कहना है कि जेनरिक दवाओं की जगह महंगी दवाइयां लिखने वाले डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

सरकार के आदेश अनुसार सभी डॉक्टर को हिदायत दी गई है कि वह जेनरिक दवाओं को लिखे। उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी में 96% दवाइयां उपलब्ध रहती है।

जबकि इसके बाबजूद जो दवाइयां उपलब्ध नहीं होती उन्हें आरकेएस फंड से खरीदा जाता है।

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