इस सेवानिवृत अध्यापक ने कर दिया कमाल, गर्म इलाके में 20 प्रजातियों के फलों का उत्पादन

आशीष गुप्ता। दाड़लाघाट
भौतिक सुख के युग में भी मदनलाल शुक्ला ने परिश्रम व क्रियाशीलता की डगर नहीं छोड़ी है। दाड़लाघाट के समीप छामला गांव में लगभग 20 प्रजातियों के फलों का उत्पादन करके क्षेत्र वासियों के लिए मार्गदर्शक के रूप में प्रेरणा का कार्य किया है।

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शिक्षा विभाग में कई वर्षों की अध्यापन सेवा के उपरांत अपनी निजी भूमि पर शौकिया तौर पर विभिन्न फलदार पौधे लगाएं हैं,जिनमें अधिकांश पौधों ने फल देने प्रारंभ कर दिए हैं।इन पौधों में आम,अमरूद, संतरे , लिची पपीता,नाशपति,पल्लम,जापानी,फल,अनार,नींबू केले,खुरमानी सुआबेर आदि पौधे मदनलाल शुक्ला ने अपने बगीचे में उगाए हैं।इन सब फलों मे लीची का सबसे अच्छा उत्पादन हो रहा है,जोकि मार्किट में अच्छी आमदनी के साधन के साथ आसानी से बिकने वाला फल है, जिसे जंगली जानवर व पशु पक्षी भी अधिक नुकसान नहीं करते हैं।

सब्जियों व फलों के उत्पादन के लिए बागवानी विभाग व पंचायत द्वारा इन्हें पुरस्कृत भी किया गया है।आवश्यकता है ऐसे बागवानों को सरकार द्वारा विशेष मार्गदर्शन व प्रोत्साहन की जिससे यह बागवान उन्नत फलों की पैदावार कर सके और सदैव फलों की पैदावार के लिए खुद भी उत्साहित रहें और लोगों को भी उत्साहित एवं प्रेरित करते रहे।

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