सराहां में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन में कवियों ने बांधा समां

भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से राजभाषा पखवाड़ा आयोजित

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न्यूज़घाट टीम। सराहां

भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय नाहन की ओर से राजभाषा पखवाड़ा के अवसर पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सराहां में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें जिला भर से आए कवियों ने कविता पाठ किया।

कार्यक्रम में सेवानिवृत प्रोफेसर एनडी शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। जबकि अध्यक्षता विद्या नंद सरैक ने की। मंच संचालन दलीप वशिष्ट ने किया। इस दौरान जिला भाषा अधिकारी अनिल हारटा, स्कूल के प्रधानाचार्य रोहित वर्मा, रणजी क्रिकेटर संग्राम सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहें।

सबसे पहले युवा कवि धनवीर परमार ने “भारतीयों की देह में जब तक आत्मा जिंदा रहेगी”, कविता सुनाई।
कुमारी ममता ठाकुर ने “बाबाओ का झमेला पकड़ा गया अकेला अकेला”, सुना दाद पाई।

वरिष्ठ कवि दीपचंद कौशल ने “बालक को प्यारी लगे अपनी की बिंदी”, से समा बांधा। युवा कवि पंकज तन्हा ने शहर में “शुरू नई दास्तान हो गई, सच बेजुबाँ हुआ, झूठ की जुबान हो गयी”, से वाहवाही लूटी।

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गीताराम माहिया ने “मेरे भारत को दरिंदों ने दोजख बना डाला”, से दाद बटोरी। मामराज शर्मा ने भारत का “जन मन क्या सोचे उनकी बात बताता हूं”, कविता से दाद बटोरी। शबनम शर्मा ने “अम्बर की खिड़की से झांकती हिंदी, टप टप आंसू बहाने लगी”, कविता से खूब तालियां बटोरीं व
‘शिवा धरा वेश ने जागो प्यारे जागो पुकारती है भारती” से समा बंधा।

आचार्य ओम प्रकाश राही ने “टिकट की खातिर हम तो पल्ला भी अपना झाड़ लेते है, और एक तुम हो कि इसे बेरुखी से फाड़ लेते हैं” से समा बांधा।

दलीप वशिष्ठ ने “मेरी जो हिंदी है चढ़ता सूरज है सिंदूरी बिंदी है” माहिया से खूब समा बंधा। स्पर्श चौहान ने “कोशिश कर हल निकलेगा, आज नही तो कल निकलेगा” से वाह वाही लूटी। अर्चना शर्मा ने “जहां रोटी को न जद्दो जेहद हो, एक ऐसा घर बनाना चाहती हूं” गजल से समा बांधा।

इस मौके पर चिरानंद, डॉ ईश्वर राही, हेतराम, नासिर युसुफ़ज़ई, डॉ ओम प्रकाश राही, शून्य विनोद, सावित्री, कनिका पांडे, नीतिका शर्मा, प्रियंका, महक आदि ने कविता पाठ किया।

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